वाइफ स्वैपिंग (पत्नी की अदला बदली) क्या है? क्या ये भारत में भी प्रचलन में है?

 वाइफ स्वैपिंग (पत्नी की अदला बदली) क्या है? क्या ये भारत में भी प्रचलन में है?


पहले तो ये समझ लेते है की वाइफ स्वैपिंग होती क्या है ?

स्वैप करने का मतलब होता है अदला-बदली करना. वाइफ स्वैपिंग में या तो दो पुरुष या पुरुषों का समूह आपस में मिलकर अपनी पत्नियों की अदला बदली करता है. ये अधिकतर एक रात या दिन का अरेंजमेंट होता है. इसके बाद इसका ज़िक्र भी कोई नहीं करता. पहले एक हाई क्लास सोसाइटी का सीक्रेट मानी जाने वाली ये प्रैक्टिस अब मिडल क्लास तक भी पहुंच गई है. इसके बारे में ज्यादा जानकारी अवेलेबल नहीं है, सिवाय चंद ख़बरों के.

दोस्तो कमेंट करें बताए क्या स्वैपिंग सही है ??

अँग्रेजी भाषा के शब्द स्वैप (swap) का अर्थ होता है विनिमय या एक के बदले में दूसरी चीज देना और वाइफ़ स्वैपिंग का अर्थ होता है दो या अधिक विवाहित युग्मों द्वारा परस्पर सहमति से एक-दूसरे के जीवनसाथी के साथ यौनक्रीड़ा करके आनंद लेना।संभवत: ऐसे कृत्य चोरी-छिपे अघोषित रूप से समाज में अत्यधिक सीमित तथा गुप्त रूप में सदैव विद्यमान रही है किन्तु वर्तमान मे यह सीमित रूप में रहते हुये भी मुखर हो चुकी है।

जहाँ ऐसा माना जाता है कि पूर्व में यह कृत्य केवल समाज के उच्च वर्ग में ही प्रचलित था वहीं वर्तमान में इंटरनेट के प्रसार के पश्चात यह मध्य वर्ग में भी फैल गया है। बहुत से युग्म जो शारीरिक रूप से वाइफ़ स्वैपिंग का साहस नहीं जुटा पाते हैं वे इंटरनेट का प्रयोग करके वीडियो चैट के माध्यम से अपनी-अपनी पत्नी के साथ यौनक्रीड़ा करते हुये परस्पर एक दूसरे को दिखा कर आनंद लेते हैं और अन्य युग्म की पत्नी को शारीरिक रूप से न सही, अपनी आँखों से देखते हुये व अपने कानों से उनकी बात सुनते हुये, काल्पनिक रूप में उसके साथ सहवास करते हैं जबकि वास्तव में वे अपनी पत्नी के साथ ही सहवास कर रहे होते हैं।

वर्तमान में बहुत सी ऐसी बेबसाइट्स हैं जिन पर वाइफ़ स्वैपिंग के संबंध में इच्छुक युग्म अपनी इच्छा प्रकट करते हैं और फिर संभवत: उनमें से कुछ ऐसा सचमुच में कर भी बैठते हैं।

कुछ युग्म विभिन्न सामाजिक व नैतिक कारणों से लक्ष्मणरेखा लाँघ नहीं पाते हैं किन्तु वे भी अपने यौन जीवन को पुर्नपरिभाषित (redefine) करने का प्रयत्न करते हैं। घनिष्ठ मित्र मंडली में सपत्नीक बैठ कर मद्यपान करने के पश्चात पोर्न फ़िल्में देखते हुये वे अपने यौन अनुभवों का वर्णन करते हैं तथा कुछ प्रकार के खेल खेलते हैं कि जिसमें हारने वाले व्यक्ति को अपने पहने हुये कपड़ों को एक-एक करके सबके सामने ही उतारना होता है, भले ही वह नग्न हो जाये।

अंत में यही कहा जा सकता है कि इंटरनेट ने भले ही ‘बसुधैव कुटुंबकम’ की मूल भावना को साकार न किया हो किन्तु यौन क्रीड़ा जैसे आनंदानुभूति से संबंधित विषयों में तो दुनिया एक हो ही रही है।


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